वक्त-बेवक्त

 




मैं शायर तो नहीं....

आना कहां, मालूम नहीं 
जाना कहां, मालूम नहीं
वक्त बेवक्त, सफर है अपना
मंजिल कहां, मालूम नहीं




लोग आते जा रहे हैं, लोग जाते जा रहे हैं
जाने सफर में कहां फसा हुआ हूं
दुनिया चल रही है, मैं इंतज़ार कर रहा हूं


इंतज़ार की उनसे आंखें मिले
इंतज़ार की ये दिन ढले, फिर शब खिले

इंतज़ार, की हम फिर साथ हों
इंतज़ार की तुझसे बात हो

इंतजार की कब वो रात हो
इन हाथों में तेरा हाथ हो,

चांद छिपा हो लेकिन फिर
शबनम की बरसात हो

सब खो कर तुझको पाने का
इतंजार है तेरे आने का
इंतज़ार गुलों के खिलने का
इंतजार दिलों के मिलने का

इन राहों के तेरी ओर मुड़ने का है इंतजार
हां तुझसे जुड़ने का है मुझे इंतजार 
कैसे बताऊं अब भी सिर्फ तुमस प्यार 
मुझको अब भी सिर्फ तुम्हारा इंतजार


आंखें बंद कर तुम्हें याद कर रहा हूं
लम्हे थाम कर खुद से बात कर रहा हूं
दुनिया चल रही है, मैं इंतज़ार कर रहा हूं




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